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नई दिल्ली में गांवों की हर सड़क को मिलेगा यूनिक कोड, डिजिटल मैपिंग से एम्बुलेंस और आपात सेवाओं को मिलेगी रफ्तार

पंचायती राज मंत्रालय ने गांवों की सड़कों के लिए डिजिटल रोड रजिस्ट्री, कोडिंग और ग्रेडिंग सिस्टम लागू करने की तैयारी शुरू की

सत्याग्रह लाइव। पंचायती राज मंत्रालय देश में पहली बार गांवों के भीतर की हर सड़क के लिए डिजिटल कोडिंग और ग्रेडिंग सिस्टम लागू करने जा रहा है। इस पहल से डिजिटल रोड रजिस्ट्री तैयार होगी, जिससे एम्बुलेंस, दमकल और अन्य आपात सेवाओं को गंतव्य तक समय पर पहुंचने में सुविधा मिलेगी।

पंचायती राज मंत्रालय ने गांवों के भीतर स्थित सभी सड़कों को व्यवस्थित रूप से चिन्हित करने, नाम देने और उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की पहल शुरू की है। इसके तहत हर सड़क का एक निर्धारित नाम, आकार और यूनिक कोड होगा। मंत्रालय ने नई व्यवस्था को अंतिम रूप देने से पहले नागरिकों, स्थानीय समुदायों और अन्य हितधारकों से सुझाव भी आमंत्रित किए हैं।

आपात सेवाओं और सरकारी योजनाओं को मिलेगा लाभ

पंचायती राज मंत्रालय के सलाहकार वी. उदय कुमार ने बताया कि गांवों के अंदर की सड़कों का कभी व्यवस्थित दस्तावेजीकरण या मैपिंग नहीं की गई। इसके कारण मेडिकल इमरजेंसी के दौरान एम्बुलेंस, डाक कर्मचारी और कूरियर सेवाओं को सही स्थान तक पहुंचने में कठिनाई होती है। मंत्रालय के अनुसार, MGNREGA, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) और प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना (PMGY) जैसी योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन भी प्रभावित होता है।

हर सड़क को मिलेगा यूनिक नाम और कोड

पंचायती राज मंत्रालय के संयुक्त सचिव बिजय कुमार बेहरा ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य भारत के हर गांव की प्रत्येक सड़क को यूनिक नाम और कोड प्रदान करना है, जो साइनबोर्ड पर प्रदर्शित होगा, डिजिटल मैप पर दिखाई देगा और राष्ट्रीय डेटाबेस से जुड़ा रहेगा। मंत्रालय के अनुसार, अलग-अलग एजेंसियों द्वारा अलग-अलग नामकरण पद्धति अपनाने से भ्रम, प्रयासों की पुनरावृत्ति और सार्वजनिक धन की बर्बादी होती है।

तीन श्रेणियों में होगा सड़कों का वर्गीकरण

नई व्यवस्था के तहत गांव की सड़कों को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। मेन रोड गांव को एक सिरे से दूसरे सिरे तक जोड़ने वाली मुख्य सड़क होगी। क्रॉस रोड वे सड़कें होंगी जो मेन रोड को काटेंगी। अन्य सड़क और जुड़ी हुई सड़क के रूप में छोटी गलियों और संपर्क मार्गों को शामिल किया जाएगा। हर सड़क को अल्फान्यूमेरिक कोड दिया जाएगा और PMGSY के OMMS के माध्यम से डुप्लीकेट कोड को रोका जाएगा।

ग्राम मानचित्र और QR कोड से मिलेगी पूरी जानकारी

मंत्रालय के अनुसार, ग्राम मानचित्र एक जियोस्पेशियल प्लानिंग और मॉनिटरिंग एप्लीकेशन के रूप में कार्य करेगा, जहां रोड कोड, DIGIPIN कोड, LGD कोड और PMGSY डेटा को एकीकृत किया जाएगा। PMGSY सड़कों के साइनबोर्ड पर QR कोड लगाए जाएंगे, जिन्हें स्कैन करके नागरिक सड़क की जानकारी, मरम्मत रिकॉर्ड और नेविगेशन डेटा देख सकेंगे। ग्राम पंचायत अपने अधिकार क्षेत्र में सड़कों की पहचान, नामकरण और ग्रेडिंग की मुख्य अथॉरिटी होगी।

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