धर्म-संस्कृति

पर्युषण पर्व के अष्टम दिवस पर संवत्सरी पर्व की आराधना, बारसासूत्र वांचन एवं चैत्य परिपाटी का आयोजन

श्री सौधर्म बृहत्तपोगच्छीय त्रिस्तुतिक जैन श्वेताम्बर श्रीसंघ, इंदौर* के तत्वावधान में विविध धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन

पर्युषण पर्व के अष्टम दिवस पर संवत्सरी पर्व की आराधना, बारसासूत्र वांचन एवं चैत्य परिपाटी का आयोजन

द्विशताब्दी गुरुराज स्पर्श चातुर्मास के अंतर्गत सुविशाल गच्छाधिपति जैनाचार्य श्री नित्यसेन सूरीश्वरजी के चातुर्मास ने सम्बोधित किया।

*इंदौर।* पर्युषण पर्व के अष्टम दिवस, संवत्सरी पर्व के पावन अवसर पर *श्री सौधर्म बृहत्तपोगच्छीय त्रिस्तुतिक जैन श्वेताम्बर श्रीसंघ, इंदौर* के तत्वावधान में विविध धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। धर्मसभा में श्रद्धालुओं ने बारसासूत्र का श्रवण, प्रवचन, सामायिक, साधर्मिक भक्ति, जीवदया एवं चैत्य परिपाटी सहित विभिन्न आराधनाओं में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

मीडिया समन्वयक राजेश जैन युवा ने बताया कि माता-पिता की सेवा से सार्थक होती है पर्युषण आराधना*धर्मसभा में प्रवचन के दौरान कहा गया कि संवत्सरी पर्व के अवसर पर *त्रिशला माता के जीवन एवं भगवान महावीर स्वामी के आदर्शों का चिंतन* करना चाहिए। भगवान महावीर स्वामी ने अपने माता-पिता के प्रति अत्यंत आदर एवं सेवा का भाव रखा। उन्होंने अभिग्रह लिया था कि जब तक माता-पिता जीवित हैं, तब तक उन्हें किसी प्रकार की तकलीफ नहीं देंगे। प्रवचन में श्रद्धालुओं को प्रेरणा दी गई कि माता-पिता की सेवा करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। यदि हम अपने माता-पिता की सेवा करेंगे, तभी पर्युषण पर्व की आराधना सार्थक होगी।

*बारसासूत्र का एक-एक शब्द आत्मशुद्धि की प्रेरणा देता है*
धर्मसभा में *बारसासूत्र के महत्त्व* पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि बारसासूत्र का एक-एक शब्द मनुष्य को कषायों से बाहर आने का प्रयास करने की प्रेरणा देता है। यह प्रभु के वचन हैं और कल्पसूत्र का सार माना जाता है। जिन्होंने कल्पसूत्र का श्रवण नहीं किया, उनकी पूर्ति भी बारसासूत्र के श्रवण से हो जाती है। इस अवसर पर *मुनि श्री विद्वदरत्न विजयजी एवं मुनि श्री प्रशमसेन विजयजी* ने अनवरत तीन घंटे से अधिक समय तक खड़े रहकर बारसासूत्र का वांचन किया। 500 से अधिक आराधक सामायिक के वस्त्रों में उपस्थित रहे। समस्त महिलाओं ने भी सामायिक में रहकर सूत्र श्रवण किया। बारसासूत्र के श्रवण को पूरे वर्षभर के कर्मों के क्षय की दिशा में अत्यंत महत्त्वपूर्ण बताते हुए कहा गया कि इस अवसर पर *पार्श्वनाथ भगवान एवं भगवान महावीर स्वामी के चरित्र का संस्कृत में वाचन* किया गया। नेमिनाथ भगवान का चरित्र भी पढ़ा गया। *मगनबाई छत्तर के परिवार ने बारसासूत्र वोहराया* तथा उपस्थित जनसमुदाय को दर्शन करवाए। वहीं *आदिनाथ भगवान के निर्वाण की अंतिम गाथाएँ गच्छाधिपति श्री के श्रीमुख से प्रसारित हुईं।*

*पर्युषण पर्व आत्मा को परमात्मा बनने की दिशा में अग्रसर करने का अवसर*
प्रवचन में कहा गया कि पर्युषण पर्व केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि *आत्मा को परमात्मा बनने की दिशा में अग्रसर करने का अवसर* है। आत्मा जब माँ की कोख में आती है, तभी से जीवन में संस्कारों का महत्त्व प्रारंभ हो जाता है। जिनकुल में आध्यात्मिक आराधना होने से पुण्य की वृद्धि होती है। जब तक पुण्य प्रबल रहता है, तब तक जीवन में उन्नति होती रहती है। पर्युषण पर्व के अवसर पर *1200 सूत्रों का श्रवण* किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा गया कि जब तक जीवन है, तब तक धर्माराधना के माध्यम से जीवन को कृतार्थ करना चाहिए।

*साधर्मिक भक्ति एवं जीवदया धर्म के अभिनव अंग*
धर्मसभा में *साधर्मिक भक्ति और जीवदया* को धर्म के अभिनव अंग बताते हुए कहा गया कि साधर्मिक भक्ति से तीर्थंकर गोत्र का बंध भी हो सकता है। साधर्मिकों की सहायता करने के बाद उसे भूल जाना चाहिए तथा उसका अहंकार नहीं करना चाहिए। प्रवचन में कहा गया कि जहाँ हमारा साधर्मिक कमजोर होगा, वहाँ वह धर्म परिवर्तन भी कर सकता है। इसलिए परिवार के परिपालन के साथ-साथ साधर्मिक भक्ति करना भी आवश्यक है। दो नगर साधर्मिक भक्ति के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध थे। पुण्य के प्रबल होने पर उन्नति होती है, लेकिन पुण्य कमजोर पड़ने पर बड़े-बड़े साम्राज्य और संपत्तियाँ भी धराशायी हो जाती हैं।

*सोमचन्द्र सेठ की सत्य घटना से ईमानदारी एवं साधर्मिक भक्ति की प्रेरणा*
धर्मसभा में *सोमचन्द्र सेठ की सत्य घटना* का उल्लेख करते हुए कहा गया कि किसी का एक पैसा भी नहीं खाना चाहिए। प्रसंग में कोली ठाकुर को कुछ धन चढ़ाया गया। सेठ ने कहा, “सबको दिया, तुझे नहीं दूँगा।” उन्होंने सोमचन्द्र सेठ को एक दृष्टि से देखा। जब सारे चौपड़े देखे गए, तो सोमचन्द्र सेठ के साथ कोई लेन-देन नहीं निकला। सोमभद्र सेठ ने कहा कि इसे घर खर्च में डाल दो। यह उनके विश्वास और ईमानदारी का प्रमाण था। बाद में माणक चौक, अहमदाबाद में सेठ के पास धन के संबंध में चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि पहले घर चलो और साधर्मिक भक्ति करो। चौपड़े देखे गए, लेकिन कोई खाता नहीं मिला। बाद में मुनीम आया और दोनों ने धन मिलाकर पालीताणा में टूक बनवा दी। वह *चौमुख टूक आज भी साधर्मिक भक्ति की प्रेरणा देती है।* प्रवचन में श्रद्धालुओं से ऐसी ही साधर्मिक भक्ति एवं जीवदया करने तथा अहिंसा धर्म को अपनाने का आह्वान किया गया।

*जीवदया एवं अहिंसा का संदेश*
*नत्थूशाह वारिया* के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया गया कि उन्होंने एक आदिवासी से बन्दूक छोड़ने को कहा। आदिवासी ने उनसे कहा, “आपने औरत को छोड़ दिया?” यह सुनकर वह उनके पैरों में गिर पड़ा। 72 दिन के संथारे के पश्चात धानेरा के पास वडजामडा के निकट उनका स्थान बनाया गया। यह प्रसंग त्याग, अहिंसा और आत्मकल्याण की प्रेरणा देता है।

*चैत्य परिपाटी में चतुर्विध संघ ने किए जिनालयों के दर्शन*
प्रवचन एवं शास्त्र वांचन के पश्चात *चतुर्विध संघ सहित चैत्य परिपाटी* निकाली गई। इस दौरान बैंड-बाजों के साथ *आदिनाथ मंदिर, महावीर बाग (अंदर), चिंतामणि पार्श्वनाथ मंदिर, महावीर बाग (बाहर) एवं केशरी वाटिका मंदिर* में दर्शन किए गए। तीनों स्थानों पर मुनि भगवंतों ने चैत्यवंदन करवाया। *अंकितजी पारख परिवार तथा सोहनलालजी, सोभागमलजी एवं भूपेंद्रजी सेठ राणापुरवाला की ओर से छाप रखी गई।*

*जीवदया एवं साधर्मी सेवा में श्रद्धालुओं ने लिया लाभ*
सूत्रवाचन के पश्चात जीवदया में *सुनीलजी कमलचंदजी कुक्षी, राजेशजी रतनलालजी भंडारी, अजीतजी विमलजी मेहता, हीरालालजी बाफना, विनयजी पीपाड़ा, संघवी परिवार, राजेशजी, रितेशजी गिरिया, शशिकांतजी सकलेचा (डबल), पुखराजजी कोठारी, संतोषजी रखबचंदजी जैन, पूर्वीजी कमलजी कटारिया (डबल), सुभाषजी चौपड़ा, मुकेशजी महेशजी पीपाड़ा, श्लोकजी विजयजी मेहता, ललितजी कावड़िया* सहित अनेक लोगों ने बढ़-चढ़कर लाभ लिया।

*साधर्मी सेवा में* *समरथमलजी संघवी, नरेंद्रजी सेठ राणापुर, धनराजजी मनीषजी संघवी, श्रीपालजी सकलेचा, प्रमोदजी राजमलजी वया, विरेन्द्रजी लुंकड, शांतिलालजी गजेंद्रजी अनिलजी सकलेचा, संघवी परिवार महेंद्रजी बागवाला, रितेशजी संतोषलालजी कुक्षी, राजेंद्रजी जैन मामा, राकेशजी मुकेशजी पिपलौदा, प्रभातजी कुलदीपजी घंटाघर, कांतिलालजी दलीचंद्रजी भंसाली, राजेंद्रजी पूनमचंदजी रुणवाल, सुरेंद्रजी नरेंद्रजी राणापुर, पुखराजजी, संतोषजी, डॉ. ललितजी प्रखरजी कावड़िया, कैलाशजी मनोजजी मेहता, मुकेशजी जयंतीलालजी पोसित्रा, राजेन्द्रकुमारजी केशरीमलजी झाबुआ, भूपेंद्रजी रत्नेशजी संघवी मंदसौर, सुनीलकुमारजी कमलचन्दजी कुक्षी, महेशजी मुकेशजी पीपाड़ा, तेजकुमारजी सतीशजी अभयजी बम्बोरिया, हेमंतजी अशोकजी ललितजी दुग्गड़, दिलीपजी जैन, चन्द्रकलाजी फतेहचंदजी चौपड़ा, पवनजी धन्नालालजी कोठारी, राजेशजी रतनलालजी भंडारी, अजीतजी विमलजी मेहता, हीरालालजी बाफना, सुरेशजी मनीषजी भंडारी, गोलूजी प्रितेशजी सकलेचा, अजीतजी संघवी / प्रवीणजी पूर्णिमा, मनीषजी रितेशजी गिरिया, रमेशजी जुहारमलजी, ललितजी चौरड़िया, मानकबाईजी मगनलालजी, लाजीसजी चोरड़िया, प्रदीपजी समीरमलजी आंचलिया, यतिंद्रकुमारजी कोलन, समरथमलजी वकील सा., रविजी जयजी रांका* सहित अनेक लोगों ने बढ़-चढ़कर लाभ लिया।

*तपस्वियों के पारणा का आयोजन 16 सितम्बर को*
*पांचम का उपवास, गुरुराज तप एवं अट्ठाई तपस्वियों का पारणा* बुधवार, 16 सितम्बर को प्रातः 8 बजे से प्रारम्भ होगा। इसके लाभार्थी *श्रीमती राजकुमारीजी दिलीपजी संजयजी सेक्रेटरी परिवार* हैं। सभी श्रद्धालुओं को सादर आमंत्रित किया गया है।

*कुंवर मंडली आंगी एवं आरती के लाभार्थी* – दिनेशचंद्रजी कमलचंद्रजी दुग्गड़। *जयंतसेन धाम की आंगी एवं आरती के लाभार्थी* – अंकितजी दिनेशजी सरदारमलजी मेहता (खाचरौदवाला)। *आज की प्रभावना* – 15 गुरु भक्ति की ओर से ₹50 की प्रभावना वितरित की गई। *चातुर्मास के मुख्य लाभार्थी* – श्री रविजी प्रतिभाजी मोदी, राजगढ़वाला। *बहुमान के लाभार्थी* – श्री हीरालालजी अमिताजी बाफना। *केसरी वाटिका में परमात्मा की शाम की आरती के लाभार्थी* – आशीषजी जैन। *पुण्यसम्राट की शाम की आरती के लाभार्थी* – भूपेंद्रजी सोहनलालजी जैन। *दादा गुरुदेव की शाम की आरती के लाभार्थी* – राजेंद्रजी मनोहरलालजी भटेवरा।

*संवत्सरी पर्व के अवसर पर प्रतिक्रमण के समय इस प्रकार रहेंगे— | पुरुषों का प्रतिक्रमण | दोपहर 3:30 बजे | केसरी वाटिका प्रवचन मंडप | | महिलाओं का प्रथम चरण। दोपहर 1:30 बजे | केसरी वाटिका मंदिर | | महिलाओं का द्वितीय चरण | शाम 4 बजे | केसरी वाटिका मंदिर |*

*गुरुराज द्विशताब्दी तप आराधना एवं सिद्धि तप*
गुरुराज द्विशताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर चल रही विशेष तप आराधना के अंतर्गत *आज 28 भाई-बहनों का उपवास* रहा। वहीं *54 तपस्वी भाई-बहनों की सिद्धि तप आराधना* निरंतर चल रही है। आज तपस्वियों की आठवीं लड़ी का आठवाँ उपवास है। *सिद्धि तप के लाभार्थी श्री विनोदजी विभाजी संघवी, वल्लभ नगर* हैं।

*धर्मसभा का संचालन *महेंद्र बागवाला* ने किया एवं आभार *धनराज संघवी* ने माना एवं सूचनाए *नीरज सुराणा* ने दी।*

धर्मसभा में *प्रभातजी जैन घंटाघर, रमेशजी श्रीश्रीमाल, नरेंद्रजी राठौर, सुनीलजी अम्बोर, डॉ. राजेंद्रजी बागवाला, संतोषजी जैन मामा, जयजी रांका, प्रवीणजी जैन पूर्णिमा, नवीनजी भंसाली, तेजकुमारजी बम्बोरिया, नैनेशजी पीपाड़ा, पुष्पेंद्रजी जमींदार, विनयजी पीपाड़ा एवं यशवंतजी बोड़ाना* सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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