उत्साह से मना विश्व आदिवासी दिवस, सांस्कृतिक रैली में जमकर थिरके युवा
पारंपरिक वेशभूषा, तीर-कमान और वाद्य यंत्रों के साथ निकली रैली; लोकगीतों की धुन पर झूमते नजर आए समाजजन, जगह-जगह हुआ स्वागत
उत्साह से मना विश्व आदिवासी दिवस, सांस्कृतिक रैली में जमकर थिरके युवा
पारंपरिक वेशभूषा, तीर-कमान और वाद्य यंत्रों के साथ निकली रैली; लोकगीतों की धुन पर झूमते नजर आए समाजजन, जगह-जगह हुआ स्वागत
आशीष यादव धार।
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को धार शहर में आदिवासी समाज की ओर से उत्साह और उमंग के साथ विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। आदिवासी समाज समिति के बैनर तले शहर में भव्य सांस्कृतिक रैली निकाली गई। रैली में बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवा-युवतियां हाथों में तीर-कमान लेकर चल रहे थे, वहीं मांदल, ढोल और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर लोकगीत और लोकनृत्य ने पूरे माहौल को आदिवासी संस्कृति के रंग में रंग दिया। रैली दोपहर में किला ग्राउंड से शुरू हुई। यहां से समाजजन अनुशासित तरीके से रैली के रूप में आगे बढ़े। रैली में युवाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। बड़ी संख्या में युवक-युवतियां पारंपरिक परिधान पहनकर पहुंचे थे। कई लोग हाथों में तीर-कमान, पारंपरिक वाद्य यंत्र और समाज की संस्कृति से जुड़े प्रतीक लेकर चल रहे थे। जैसे-जैसे रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होकर आगे बढ़ी, वैसे-वैसे इसमें शामिल लोगों का उत्साह भी बढ़ता गया।
लोकगीतों पर झूमते रहे युवा:
रैली में शामिल युवाओं ने आदिवासी लोकगीतों की धुन पर जमकर नृत्य किया। मांदल और ढोल की थाप के साथ पारंपरिक नृत्य करते हुए समाजजन आगे बढ़ रहे थे। युवतियां भी पारंपरिक वेशभूषा में रैली की शोभा बढ़ा रही थीं। शहर के अलग-अलग हिस्सों से लोग रैली को देखने के लिए सड़क किनारे खड़े नजर आए। रैली का विभिन्न स्थानों पर लोगों ने स्वागत भी किया। किला ग्राउंड से मोहन टॉकीज होते हुए निकली रैली रैली किला ग्राउंड से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए मोहन टॉकीज और आनंद चौपाटी पहुंची। इसके बाद रैली अपने निर्धारित कार्यक्रम स्थल पर पहुंची। पूरे मार्ग पर समाजजनों की बड़ी मौजूदगी रही। रैली के दौरान आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता की झलक देखने को मिली।
हजारों समाजजन हुए शामिल:
रैली में हजारों की संख्या में समाजजन शामिल हुए। इनमें बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल रहे। बड़ी संख्या में लोग पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे थे। कई समूह अपने साथ मांदल, ढोल और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्र लेकर आए थे। डीजे की धुनों के साथ भी युवा उत्साह से नृत्य करते हुए नजर आए। रैली में आदिवासी समाज की एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया गया।
जल, जंगल और जमीन का दिया संदेश:
इस वर्ष आदिवासी समाज समिति द्वारा कार्यक्रम के माध्यम से जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का संदेश भी दिया गया। कार्यक्रम एक झाकी बनाई गई जिसमें आधुनिक संसाधनों से जगल जमीन पर आधारित थी जिसने विकास के साथ जगलो ओर जमीनों का विनाश किया जा रहा हे स्वदेशी विरासत, जीवन, कल्याण और सुरक्षा से जुड़े विषयों को प्रमुखता दी गई। समाजजनों ने अपनी परंपराओं और संस्कृति को संरक्षित रखने के साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश दिया।
विशाल आमसभा और सांस्कृतिक कार्यक्रम
आयोजक समिति के अध्यक्ष विपुल चोपड़ा ने बताया कि रैली के निर्धारित स्थान पर पहुंचने के बाद विशाल आमसभा का आयोजन किया गया। इसमें समाज के विभिन्न पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने समाज की एकता, शिक्षा, संस्कृति, परंपराओं और अधिकारों से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें कलाकारों और युवाओं ने आदिवासी लोक संस्कृति की प्रस्तुतियां दीं।
यातायात व्यवस्था के लिए पहले से की गई तैयारी
रैली को देखते हुए यातायात पुलिस ने शहर के रैली मार्ग पर पहले से व्यवस्थाएं की थीं। प्रमुख मार्गों पर यातायात को व्यवस्थित किया गया, ताकि रैली के दौरान आम लोगों को परेशानी कम हो। पुलिस और यातायात अमले की मौजूदगी में रैली निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ी और कार्यक्रम स्थल तक पहुंची।



