बड़वाह। बड़वाह के शिक्षा जगत में निर्मल विद्यापीठ की दोहरी उपलब्धि…..सर्वोत्तम शिक्षण पद्धति एवं सर्वोत्तम पर्यावरण संरक्षित विद्यालय के सम्मान से नवाजा गया…

कपिल वर्मा बड़वाह। बड़वाह क्षेत्र में शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहे बड़वाह की निर्मल विद्यापीठ ने एक बार फिर क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। इंदौर में आयोजित समावेश स्कूल अवार्ड्स – इंदौर अध्याय 2026 में निर्मल विद्यापीठ को दो प्रतिष्ठित श्रेणियों में सम्मानित किया गया।
विद्यालय को “सर्वोत्तम शिक्षण पद्धति” तथा “सर्वोत्तम पर्यावरण संरक्षित विद्यालय” के सम्मान से नवाजा गया। यह सम्मान आर्टेमिस एडुसॉल्यूशंस द्वारा आयोजित समारोह में प्रदान किए गए। समारोह में सीबीएसई के राष्ट्रीय परीक्षा संयोजक संयम भारद्वाज की गरिमामयी उपस्थिति रही।
संस्थापकों की स्मृति को समर्पित उपलब्धि ———विद्यालय प्रबंधन एवं परिवार ने इस दोहरी उपलब्धि को विद्यालय के भूतपूर्व निदेशक स्वर्गीय श्री केशरीमल जी जैन एवं स्वर्गीय श्री विनोद कुमार जैन की स्मृति को समर्पित किया है। विद्यालय की स्थापना से लेकर उसके निरंतर विकास तक दोनों का शिक्षा के प्रति समर्पण, दूरदृष्टि एवं संस्कार आधारित सोच संस्थान के लिए प्रेरणास्रोत रही है।
विद्यालय परिवार का मानना है कि आज निर्मल विद्यापीठ जिस ऊंचाई पर पहुंचा है, उसके पीछे संस्थापकों द्वारा रखी गई मजबूत नींव और उनके द्वारा स्थापित संस्कार, गुणवत्ता एवं उत्कृष्टता के मूल्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
आधुनिक एवं प्रभावी शिक्षण पद्धति को मिली राष्ट्रीय स्तर पर पहचान——-सर्वोत्तम शिक्षण पद्धति का सम्मान विद्यालय में अपनाई जा रही आधुनिक, प्रभावी एवं विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता पर आधारित शिक्षण व्यवस्था का परिणाम है।
निर्मल विद्यापीठ में शिक्षा को केवल पाठ्यपुस्तकों एवं पारंपरिक कक्षा शिक्षण तक सीमित न रखते हुए गतिविधि आधारित अधिगम, प्रयोगात्मक शिक्षण, विषयों को व्यवहारिक रूप से समझाने, आधुनिक तकनीकी संसाधनों के उपयोग तथा विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
विद्यालय द्वारा शैक्षणिक गुणवत्ता में निरंतर सुधार के लिए किए जा रहे इन नवाचारों का सकारात्मक परिणाम विद्यार्थियों के प्रत्येक वर्ष के शैक्षणिक परिणामों एवं विभिन्न क्षेत्रों में उनके प्रदर्शन के रूप में सामने आ रहा है।
विद्यालय इस उपलब्धि का श्रेय वर्तमान निदेशक प्रतीक जैन के मार्गदर्शन, समस्त शिक्षकगण एवं कर्मचारियों के समर्पण तथा विद्यार्थियों की मेहनत को देता है।
पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को सम्मान ————– विद्यालय को प्राप्त सर्वोत्तम पर्यावरण संरक्षित विद्यालय का सम्मान भी निर्मल विद्यापीठ द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं हरित वातावरण के निर्माण के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों की महत्वपूर्ण पहचान है।
विद्यालय परिसर को स्वच्छ, हरित एवं पर्यावरण के अनुकूल बनाए रखने के साथ विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी तथा सकारात्मक पर्यावरणीय सोच विकसित करने पर विशेष जोर दिया जाता है। विद्यालय का उद्देश्य केवल बेहतर शैक्षणिक परिणाम देने वाले विद्यार्थी तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार एवं जागरूक नागरिक तैयार करना है, जो समाज और प्रकृति दोनों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें।
विद्यालय परिसर में हरियाली एवं पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे विभिन्न सकारात्मक प्रयास इसी सोच का हिस्सा हैं। इसी निरंतर प्रयास के फलस्वरूप विद्यालय को पर्यावरण संरक्षण की श्रेणी में भी यह प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुआ है।
प्राचार्य आशीष झा ने दी उपलब्धि का श्रेय सामूहिक प्रयासों को——– विद्यालय के प्राचार्य आशीष झा ने इस दोहरी उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि संस्थापकों की दूरदर्शी सोच, वर्तमान निदेशक श्री प्रतीक जैन के मार्गदर्शन, समस्त शिक्षकगण एवं स्टाफ के समर्पण और विद्यार्थियों की निरंतर मेहनत का सामूहिक परिणाम है।
उन्होंने कहा कि विद्यालय द्वारा शैक्षणिक स्तर को लगातार बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे नवीन एवं आधुनिक प्रयासों और उनके सकारात्मक परिणामों ने निर्मल विद्यापीठ को शिक्षा के क्षेत्र में एक अलग पहचान दिलाई है। इसी प्रकार पर्यावरण संरक्षण के प्रति विद्यालय की प्रतिबद्धता एवं परिसर को अधिक से अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने के प्रयासों को भी इस सम्मान के माध्यम से महत्वपूर्ण पहचान मिली है।

बड़वाह के लिए गौरव का क्षण ———— एक ही समारोह में सर्वोत्तम शिक्षण पद्धति एवं सर्वोत्तम पर्यावरण संरक्षित विद्यालय जैसे दो महत्वपूर्ण सम्मानों से निर्मल विद्यापीठ का सम्मानित होना न केवल विद्यालय परिवार, बल्कि संपूर्ण बड़वाह क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है।
विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि यह उपलब्धि भविष्य में और अधिक बेहतर करने की प्रेरणा है। निर्मल विद्यापीठ इसी प्रकार शिक्षा में नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, संस्कार निर्माण एवं पर्यावरण संरक्षण को अपनी प्राथमिकताओं में रखते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।
“संस्कार, नवाचार, गुणवत्ता एवं उत्कृष्टता”के मूल मंत्र के साथ निर्मल विद्यापीठ बड़वाह के शिक्षा जगत को नई दिशा एवं पहचान देने की अपनी यात्रा में निरंतर अग्रसर है।




