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वराह मार्च पर धार में प्रशासन का शिकंजा, समिति के कई पदाधिकारी गिरफ्तार शहर के चौराहों पर फिक्स पिकेट, 2 दर्जन थाना प्रभारी और 10 एसडीओपी समेत भारी पुलिस बल तैनात।
अनुमति निरस्त होने के बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई, एएसआई ने संरक्षित इमारत बंद की।
वराह मार्च पर धार में प्रशासन का शिकंजा, समिति के कई पदाधिकारी गिरफ्तार शहर के चौराहों पर फिक्स पिकेट, 2 दर्जन थाना प्रभारी और 10 एसडीओपी समेत भारी पुलिस बल तैनात।
अनुमति निरस्त होने के बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई, एएसआई ने संरक्षित इमारत बंद की।
आशीष यादव धार।
वराह मार्च को लेकर धार में मंगलवार सुबह से प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन द्वारा मार्च की अनुमति निरस्त किए जाने के बाद अब पुलिस ने आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। मंगलवार सुबह पुलिस ने सनातन प्रहरी समिति से जुड़े कई प्रमुख पदाधिकारियों को हिरासत में लिया। वहीं तनाव की आशंका को देखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने गंजीखाना स्थित संरक्षित ऐतिहासिक इमारत को मंगलवार को आमजन के लिए पूरी तरह बंद रखने का आदेश जारी किया है। शहर के प्रमुख चौराहों, संवेदनशील स्थानों और पीजी कॉलेज ग्राउंड के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

अनुमति नहीं मिली, फिर भी मार्च को लेकर हलचल
प्रशासन द्वारा वराह मार्च की अनुमति निरस्त किए जाने के बाद भी आयोजन को लेकर शहर में हलचल बनी हुई थी। इससे कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। शहर में लगाए गए मार्च के प्रचार होर्डिंग्स, पोस्टर, बैनर और कटआउट पहले ही हटवा दिए गए थे। मंगलवार को पुलिस की कार्रवाई के बाद पूरे मामले में तनाव और बढ़ गया।

सुबह-सुबह पदाधिकारियों को लिया हिरासत में
प्रशासन की सख्ती के बीच मंगलवार सुबह पुलिस ने वराह मार्च से जुड़े कई पदाधिकारियों को हिरासत में लिया। पुलिस कार्रवाई में विकास जाट, लोकेश यादव, आशीष बसु, सत्यनारायण रघुवंशी उर्फ टू-टू ठाकुर, संदीप यादव, बाला उर्फ विक्रम निवासी वीर सावरकर मार्ग, बाला उर्फ स्वप्निल सितौले, दीपक उर्फ रोहित सांठे तथा सत्यनारायण उर्फ सत्यम पिता सुखराम, निवासी धामनोद को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद शहर में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई।
2 दर्जन थाना प्रभारी, 10 एसडीओपी समेत फोर्स तैनात
सीएसपी शशांक सिंह गुर्जर के अनुसार सुरक्षा की दृष्टि से आयोजन की अनुमति निरस्त की गई है। पुलिस ने शहरवासियों से शांति बनाए रखने और अनावश्यक रूप से घरों से बाहर नहीं निकलने की अपील की है। सुरक्षा व्यवस्था में करीब 2 दर्जन थाना प्रभारी, 10 एसडीओपी और डीएसपी स्तर के अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में पुलिस जवानों को तैनात किया गया है। पीजी कॉलेज ग्राउंड सहित शहर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर फिक्स पुलिस पिकेट लगाए गए हैं। मोबाइल पुलिस वैन लगातार शहर में गश्त कर रही हैं।

एएसआई ने संरक्षित इमारत भी बंद कराई
वराह मार्च से जुड़े संभावित घटनाक्रम को देखते हुए एएसआई ने गंजीखाना स्थित पुरातत्व संरक्षित इमारत को मंगलवार को आमजन के लिए पूरी तरह बंद रखने का आदेश दिया है। परिसर में सूचना चस्पा कर लोगों को प्रवेश नहीं करने की हिदायत दी गई है। एएसआई ने स्पष्ट किया है कि प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत किसी भी अनाधिकृत प्रवेश या गतिविधि पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
विजय मंदिर या लाट मस्जिद, स्थल को लेकर अलग-अलग मान्यताएं
जिस ऐतिहासिक स्थल को लेकर यह पूरा घटनाक्रम सामने आया है, उसे हिंदू पक्ष विजय मंदिर और मुस्लिम समाज लाट मस्जिद के नाम से जानता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इसका निर्माण 11वीं शताब्दी में परमार वंश के राजा भोज के शासनकाल में हुआ था। स्थल के बाहर स्थित विशाल लोह स्तंभ को लेकर भी इसकी ऐतिहासिक पहचान जुड़ी हुई है।
यह स्थल स्वतंत्रता पूर्व से एएसआई के संरक्षण में है। पूर्व व्यवस्था के तहत मुस्लिम पक्ष को दोनों ईदों पर नमाज तथा हिंदू समाज को दशहरे के अगले दिन मिलन समारोह की अनुमति रहती रही है।
प्रशासन की नजर अब पूरे शहर की गतिविधियों पर
वराह मार्च की अनुमति निरस्त करने, पदाधिकारियों की गिरफ्तारी और ऐतिहासिक स्थल को बंद किए जाने के बाद प्रशासन की नजर अब शहर की गतिविधियों पर बनी हुई है। प्रमुख मार्गों और चौराहों पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी गई है। पुलिस लगातार गश्त कर रही है और किसी भी तरह की भीड़ जुटने या माहौल बिगाड़ने की कोशिश पर तत्काल कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और शांति बनाए रखने की अपील की है।




