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5 घंटे धार में रहेंगे मुख्यमंत्री, कई विभागों की खुलेगी ‘कुंडली’!अफसरों से सीधे सवाल-जवाब की संभावना।

जनविश्वास अभियान के बीच प्रशासन में तेज हलचल, लंबित शिकायतों से लेकर योजनाओं की जमीनी हकीकत तक पर हो सकती है समीक्षा;

5 घंटे धार में रहेंगे मुख्यमंत्री, कई विभागों की खुलेगी ‘कुंडली’!अफसरों से सीधे सवाल-जवाब की संभावना।

जनविश्वास अभियान के बीच प्रशासन में तेज हलचल, लंबित शिकायतों से लेकर योजनाओं की जमीनी हकीकत तक पर हो सकती है समीक्षा;

आशीष यादव,धार।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 11 सितंबर को प्रस्तावित धार दौरे ने जिला प्रशासन से लेकर विभिन्न विभागों तक हलचल बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत मुख्यमंत्री करीब पांच घंटे धार मुख्यालय में रहेंगे। जिले में कलेक्टर राजीव रंजन मीना भी ज़मीनी स्तर पर काम करके मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान और शासन की योजनाओं का का बखान जनता को बता रहे हैं। मुख्यमंत्री का जिले में इतना लंबा प्रवास प्रस्तावित होने से प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड पर है। सबसे ज्यादा चिंता उन विभागों को है, जहां लंबे समय से शिकायतें, लंबित प्रकरण और कामकाज को लेकर सवाल उठते रहे हैं। मुख्यमंत्री के सामने विभागवार समीक्षा के दौरान यदि सीधे सवाल हुए तो अफसरों को मौके पर ही जवाब देना पड़ सकता है। दौरे की आहट के साथ ही विभागों में फाइलों की धूल झाड़ने से लेकर पुराने प्रकरणों का हिसाब-किताब खंगालने तक की कवायद तेज हो गई है। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती उपलब्धियों का ब्योरा देने से ज्यादा कमियों पर सफाई देने की है। विभागीय अधिकारी अपने-अपने कामकाज की रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं,अधूरे विकास कार्य, लंबित प्रकरण, योजनाओं के क्रियान्वयन और आम लोगों की शिकायतों पर मुख्यमंत्री की नजर गई तो कई विभागों के अफसरों से मौके पर ही जवाब-तलब की स्थिति बन सकती है।

मुख्यमंत्री के दौरे को केवल औपचारिक समीक्षा नहीं, बल्कि जिले के प्रशासनिक रिपोर्ट कार्ड की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। संभावना है कि समीक्षा के दौरान अधिकारियों से योजनाओं की कागजी प्रगति के बजाय उनके जमीनी असर को लेकर सीधे सवाल किए जाएं। खासकर जनविश्वास अभियान के दौरान सामने आई शिकायतों और उनके निराकरण की स्थिति पर मुख्यमंत्री की नजर रह सकती है। मुख्यमंत्री का धार में पांच घंटे का प्रवास इसलिए भी अहम माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री के पास जिले के कामकाज को करीब से परखने का पर्याप्त समय रहेगा। ऐसे में केवल प्रस्तुतियों और उपलब्धियों के आंकड़ों से बात बनने की बजाय जमीनी स्थिति पर सवाल उठ सकते हैं। सीएम के जिला मुख्यालय आने की चर्चा के बाद कार्यालय की साफ सफाई देखने को मिल रही है।

दौरे से पहले प्रशासनिक गलियारों में इसी बात की चर्चा है कि मुख्यमंत्री किस विभाग की फाइल खोलते हैं और किस मामले में अधिकारियों से सीधा सवाल करते हैं। वन से लेकर राजस्व और आबकारी तक, कई विभाग रडार पर मुख्यमंत्री की संभावित समीक्षा में वन, आबकारी, राजस्व, स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, कृषि, खनिज, कोषालय तथा महिला एवं बाल विकास विभाग महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इन विभागों से जुड़े लंबित मामलों की स्थिति और आम लोगों से जुड़ी शिकायतों का हिसाब लिया जा सकता है।

वन विभाग में अवैध कटाई और लकड़ी तस्करी के मुद्दे
वन विभाग को लेकर जिले में समय-समय पर अवैध कटाई, संदिग्ध टीपी, हरे-भरे पेड़ों की कटाई, लकड़ी परिवहन और वन अपराधों से जुड़े मामले सामने आते रहे हैं। खैर की लकड़ियों की अंतरराज्यीय तस्करी जैसे मामलों में कार्रवाई की स्थिति भी समीक्षा के दौरान चर्चा में आ सकती है। सवाल यह भी हो सकता है कि वन अपराधों पर कार्रवाई के बाद आगे की स्थिति क्या रही और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक कितनी लगी।

आबकारी विभाग में अवैध शराब और ओवररेटिंग पर नजर:
आबकारी विभाग भी मुख्यमंत्री की समीक्षा में अहम हो सकता है। जिले में अवैध शराब के खिलाफ हुई कार्रवाई, दर्ज प्रकरण, जब्ती और गिरफ्तारियों के साथ शराब दुकानों पर ओवररेटिंग की शिकायतों पर भी सवाल उठ सकते हैं। खासकर जीरो टॉलरेंस नीति के बावजूद यदि शिकायतें सामने आ रही हैं तो अधिकारियों से कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने को कहा जा सकता है।

राजस्व विभाग में नामांतरण-सीमांकन की लंबित फाइलें:
राजस्व विभाग में नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और अन्य राजस्व प्रकरण आम लोगों की बड़ी परेशानी बने हुए हैं। मुख्यमंत्री लंबित प्रकरणों की संख्या, उनके निराकरण की समय-सीमा और शिकायतों के निपटारे की स्थिति पर अधिकारियों से जवाब मांग सकते हैं। जनविश्वास अभियान के दौरान प्राप्त आवेदनों का फॉलोअप भी इस समीक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

खनिज में अवैध उत्खनन, परिवहन की शिकायतें खनिज विभाग में अवैध उत्खनन और खनिज परिवहन को लेकर मिलने वाली शिकायतें भी समीक्षा के दायरे में आ सकती हैं। कार्रवाई, जब्ती, जुर्माना और राजस्व वसूली के आंकड़ों के साथ यह भी देखा जा सकता है कि कार्रवाई के बाद अवैध उत्खनन पर कितना नियंत्रण हुआ।

जनजातीय विभाग और छात्रावासों की व्यवस्था भी अहम मुद्दा:
जनजातीय विभाग को लेकर भी जिले में लगातार शिकायतें और चर्चाएं सामने आती रही हैं। आदिवासी छात्रावासों की व्यवस्थाएं, भवनों की स्थिति, भोजन, विद्यार्थियों की सुरक्षा, वार्डन व्यवस्था और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मामलों पर मुख्यमंत्री की नजर जा सकती है। हाल में छात्रावासों से जुड़े विवादों के कारण यह विभाग प्रशासन के लिए विशेष रूप से संवेदनशील माना जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग में अस्पतालों की व्यवस्था पर हो सकती है पड़ताल
स्वास्थ्य विभाग में जिला अस्पताल सहित ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्थाएं, चिकित्सकों और स्टाफ की उपलब्धता, दवाओं की स्थिति तथा मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं समीक्षा का हिस्सा बन सकती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक पहुंच और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचने की स्थिति पर भी सवाल उठ सकते हैं।

शिक्षा, आंगनवाड़ी और राशन व्यवस्था भी जांच के दायरे में
शिक्षा विभाग में स्कूलों की व्यवस्थाएं, विद्यार्थियों की उपस्थिति, शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़े मुद्दे सामने आ सकते हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति, पोषण आहार की उपलब्धता और बच्चों व गर्भवती महिलाओं तक योजनाओं का लाभ पहुंचने की स्थिति पर भी चर्चा संभव है।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में राशन वितरण, पात्र हितग्राहियों को खाद्यान्न मिलने की स्थिति और शिकायतों के निराकरण की जानकारी ली जा सकती है। वहीं कृषि विभाग में किसानों से जुड़ी योजनाएं, बीज-खाद की उपलब्धता और फसल संबंधी समस्याओं पर भी मुख्यमंत्री अधिकारियों से जानकारी ले सकते हैं।

पंचायत और नगरीय निकायों के कामकाज पर भी नजर
ग्रामीण विकास की योजनाओं में स्वीकृत कार्य, पूर्णता की स्थिति, भुगतान और हितग्राही योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से लोगों तक पहुंचा या नहीं इन बिंदुओं पर भी समीक्षा हो सकती है। नगरीय प्रशासन में सफाई, पेयजल, सड़क, स्ट्रीट लाइट और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठ सकते हैं।

7 अगस्त से चल रहा जनविश्वास अभियान, अब मुख्यमंत्री के सामने रिपोर्ट कार्ड
जिले में 7 अगस्त से चल रहे जनविश्वास अभियान के दौरान प्रशासन स्तर पर आम लोगों से संवाद, शिकायतों का निराकरण और योजनाओं की समीक्षा की जा रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री का दौरा अभियान की अब तक की प्रगति का सीधा परीक्षण माना जा रहा है। कलेक्टर स्तर पर जिन शिकायतों और मामलों की समीक्षा हो चुकी है, उनका फीडबैक भी मुख्यमंत्री के सामने रखा जा सकता है।

दौरे से पहले लंबित फाइलों की बढ़ी रफ्तार
मुख्यमंत्री के दौरे की सूचना के बाद विभागों में लंबित मामलों को लेकर तेजी दिखाई देने लगी है। अधिकारी पुराने रिकॉर्ड अपडेट करने, लंबित शिकायतों की स्थिति पता करने और योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट तैयार करने में जुटे हैं। कई विभागों में लंबे समय से अटकी फाइलों को भी प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है।

अब सवाल—किस विभाग पर टिकती है मुख्यमंत्री की नजर?
मुख्यमंत्री करीब पांच घंटे धार में रहेंगे, ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे केवल आंकड़ों और रिपोर्टों के जरिए जवाब दें या जमीनी स्थिति भी उतनी ही मजबूत नजर आए। जनविश्वास अभियान के बीच मुख्यमंत्री का धार दौरा कई विभागों के लिए सिर्फ समीक्षा बैठक नहीं, बल्कि जवाबदेही की अग्निपरीक्षा बन सकता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि मुख्यमंत्री किन विभागों की ‘कुंडली’ खोलते हैं, किन शिकायतों पर सीधे सवाल करते हैं और किन मामलों में मौके पर ही अधिकारियों को जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए जाते हैं।

 

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