ऐप अटेंडेंस पर ब्रेक, डीएफओ के फैसले पर उठे सवाल।
भोपाल के मार्गदर्शन तक वनरक्षकों को राहत; कर्मचारी बोले- जंगल की ड्यूटी घड़ी देखकर नहीं चलती, पहले संसाधन और सुरक्षा दें

ऐप अटेंडेंस पर ब्रेक, डीएफओ के फैसले पर उठे सवाल
भोपाल के मार्गदर्शन तक वनरक्षकों को राहत; कर्मचारी बोले- जंगल की ड्यूटी घड़ी देखकर नहीं चलती, पहले संसाधन और सुरक्षा दें
आशीष यादव धार।
धार वन मंडल में ई-एचआरएमएस और वनरक्षक ऐप के जरिए कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज कराने को लेकर शुरू हुआ विवाद फिलहाल थम गया है। वन मंडलाधिकारी विजयानंथम टीआर और राज्य कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों के बीच हुई बैठक के बाद फील्ड स्टाफ की ऐप आधारित उपस्थिति पर भोपाल मुख्यालय से मार्गदर्शन मिलने तक रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले के बाद वनरक्षकों ने राहत की सांस ली है, लेकिन व्यवस्था लागू करने के तरीके को लेकर डीएफओ की कार्यशैली पर सवाल भी उठ रहे हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि जंगल में वनरक्षकों की ड्यूटी सामान्य दफ्तर की तरह निर्धारित समय में खत्म नहीं होती। कई बार दिन के साथ रात में भी गश्त करनी पड़ती है। ऐसे में पंच-इन और पंच-आउट की समयबद्ध व्यवस्था व्यवहारिक परेशानी पैदा कर सकती है। दूरदराज के जंगलों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या अलग है। कई कर्मचारियों के पास सरकारी मोबाइल और पर्याप्त डेटा सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। ऐसी स्थिति में तकनीकी कारणों से हाजिरी दर्ज नहीं हुई तो कर्मचारी के वेतन पर असर पड़ने की आशंका है।

दफ्तर में ऐप से हाजिरी, जंगल में रजिस्टर जारी:
डीएफओ विजयानंथम टीआर के अनुसार भोपाल मुख्यालय का मार्गदर्शन आने तक फील्ड कर्मचारियों की ऐप आधारित उपस्थिति पर रोक रहेगी। वनरक्षक फिलहाल पहले की तरह रजिस्टर में उपस्थिति दर्ज करेंगे। वहीं दफ्तरी कर्मचारियों के लिए ऐप से उपस्थिति अनिवार्य रहेगी। छुट्टी, एसीआर और एपीएआर से संबंधित प्रक्रिया भी ऐप के माध्यम से जारी रहेगी।
वन विभाग का कहना है कि वनों में अतिक्रमण और अवैध कटाई रोकने के लिए पैदल और रात्रि गश्त प्रभावित नहीं होगी। वनरक्षकों को छह माह का प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें विभागीय नियम-कानून के साथ तकनीकी जानकारी भी शामिल होती है। टाइगर रिजर्व में एम-स्ट्रीप्स जैसे तकनीकी माध्यम पहले से इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
संघ बोला- तकनीक से परहेज नहीं, व्यवस्था पहले दुरुस्त करें:
राज्य कर्मचारी संघ के संभागीय अध्यक्ष राजेंद्र राठौर और जिला अध्यक्ष विनोद राठौर ने कहा कि कर्मचारी तकनीक के विरोध में नहीं हैं। उनकी मांग है कि ऐप लागू करने से पहले पर्याप्त प्रशिक्षण, सरकारी मोबाइल, डेटा और नेटवर्क की सुविधा दी जाए। तकनीकी खामी के कारण उपस्थिति दर्ज नहीं होने पर कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
संघ ने वनकर्मियों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया।: पदाधिकारियों का कहना है कि जंगल में अवैध कटाई और लकड़ी तस्करी रोकने के दौरान वनकर्मियों को जोखिम उठाना पड़ता है। ऐसे में विभाग को केवल डिजिटल हाजिरी पर जोर देने के बजाय कर्मचारियों की सुरक्षा, संसाधन और मैदानी परिस्थितियों पर भी प्राथमिकता से ध्यान देना चाहिए। भोपाल से आने वाले मार्गदर्शन के बाद ही अब तय होगा कि फील्ड स्टाफ की ऐप आधारित उपस्थिति किस व्यवस्था के तहत लागू होगी।



