नई दिल्ली में पेपर लीक कानून होगा और सख्त, 10 साल तक जेल, भारी जुर्माना और फास्ट-ट्रैक ट्रायल प्रस्तावित
लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन की तैयारी। संगठित पेपर लीक, परीक्षा धोखाधड़ी और सेवा प्रदाताओं की जवाबदेही तय करने के लिए सख्त दंड और समयबद्ध जांच का प्रस्ताव।

NEET पेपर लीक के बाद केंद्र सरकार लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन संबंधी विधेयक लाने की तैयारी में है। प्रस्तावित संशोधन में सख्त सजा, अधिक जुर्माना, विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें, समयबद्ध जांच और परीक्षा तंत्र की जवाबदेही बढ़ाने के प्रावधान शामिल हैं।
कानून को और सख्त बनाने की तैयारी
देशभर में NEET पेपर लीक के बाद केंद्र सरकार पेपर लीक रोकने से जुड़े कानून को और अधिक कठोर बनाने की तैयारी में है। सरकार संसद में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन संबंधी विधेयक पेश कर सकती है। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य केवल दोषियों को सख्त सजा देना नहीं, बल्कि परीक्षा माफियाओं, सेवा प्रदाता कंपनियों और संगठित गिरोहों की कानूनी जवाबदेही भी तय करना है। नए प्रस्ताव में अधिक जुर्माना, विशेष अदालतें, समयबद्ध जांच और अपील प्रक्रिया जैसी व्यवस्थाएं शामिल की गई हैं।
सजा, जुर्माना और नए अपराधों का दायरा
साल 2024 में लागू अधिनियम में गंभीर अपराधों के लिए 3 से 10 वर्ष तक की सजा और न्यूनतम ₹1 करोड़ जुर्माने का प्रावधान था। प्रस्तावित संशोधन में प्रश्नपत्र या उत्तर कुंजी लीक कराने, परीक्षा प्रक्रिया से छेड़छाड़ करने तथा अपराध में मिलीभगत करने वालों के लिए अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है। सेवा प्रदाता कंपनियों के जिम्मेदार अधिकारियों पर ₹5 करोड़ तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। कुछ रिपोर्टों में संगठित अपराध के मामलों में ₹10 करोड़ तक जुर्माने का भी उल्लेख है। जुर्माना जमा नहीं करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अतिरिक्त कारावास का प्रावधान भी लागू होगा। विधेयक में 15 प्रकार की गतिविधियों को अपराध की श्रेणी में रखा गया है, जिनमें प्रश्नपत्र लीक करना, ओएमआर शीट से छेड़छाड़, फर्जी वेबसाइट बनाना, फर्जी एडमिट कार्ड जारी करना तथा परीक्षा प्रक्रिया में अन्य प्रकार की धोखाधड़ी शामिल हैं।
फास्ट-ट्रैक अदालतें और समयबद्ध जांच का प्रस्ताव
प्रस्तावित संशोधन में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों के गठन का प्रस्ताव है, जहां प्रतिदिन सुनवाई होगी। चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने तथा पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के उपयोग से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का प्रस्ताव रखा गया है। विधेयक में परीक्षा केंद्रों के प्री-ऑडिट, अभ्यर्थियों की बायोमेट्रिक जांच, सुरक्षा व्यवस्था, सीट आवंटन, प्रश्नपत्र तैयार करने और अपलोड करने की प्रक्रिया, परीक्षा निगरानी, परीक्षा के बाद की गतिविधियों तथा दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए स्क्राइब उपलब्ध कराने जैसे प्रावधान भी प्रस्तावित हैं।
किन संस्थाओं पर लागू होगा प्रस्तावित कानून
प्रस्तावित संशोधन केवल पेपर लीक करने वाले व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहेगा। इसके दायरे में परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियां, सेवा प्रदाता कंपनियां, परीक्षा केंद्र, आईटी सिस्टम संचालित करने वाली संस्थाएं तथा संगठित गिरोह भी शामिल होंगे। यदि जांच में किसी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी या प्रबंधन की सहमति अथवा मिलीभगत से अपराध सिद्ध होता है, तो उन पर व्यक्तिगत आपराधिक दायित्व तय किया जाएगा। यह कानून UPSC, SSC, रेलवे भर्ती बोर्ड, NTA, IBPS तथा केंद्र सरकार की अन्य सार्वजनिक भर्ती और अधिसूचित परीक्षाओं पर लागू होगा। इसका उद्देश्य पूरे परीक्षा तंत्र की जवाबदेही सुनिश्चित करना है।



