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छुट्टी से तबादले तक ऑनलाइन होंगे कर्मचारियों के काम, कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।

30 सितंबर तक सभी विभागों में ई-एचआरएमएस डीई पोर्टल लागू करने की तैयारी, सेवा रिकॉर्ड से विभागीय जांच तक डिजिटल होगी पूरी प्रक्रिया

छुट्टी से तबादले तक ऑनलाइन होंगे कर्मचारियों के काम, कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।
30 सितंबर तक सभी विभागों में ई-एचआरएमएस डीई पोर्टल लागू करने की तैयारी, सेवा रिकॉर्ड से विभागीय जांच तक डिजिटल होगी पूरी प्रक्रिया
आशीष यादव धार। 
सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों के छुट्टी से लेकर तबादले तक के काम अब फाइलों और कागजी प्रक्रिया में उलझे नजर नहीं आएंगे। राज्य शासन ने कर्मचारियों की नियुक्ति से सेवानिवृत्ति तक की सेवा संबंधी प्रक्रियाओं को डिजिटल करने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों से जुड़े कामकाज का तरीका अब तेजी से बदल जायेेगा । राज्य शासन ने कर्मचारियों की नियुक्ति से लेकर सेवानिवृत्ति तक की सेवा संबंधी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सभी विभागों और उनके अधीनस्थ क्षेत्रीय कार्यालयों में ई-एचआरएमएस (e-HRMS) और विभागीय जांच मामलों के लिए डीई पोर्टल लागू किया जाएगा। इसके लिए 30 सितंबर तक की डेडलाइन तय की गई है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड, अवकाश, वेतन, जीपीएफ, पदोन्नति, परिवीक्षा अवधि, सेवा पुष्टि, स्थानांतरण और पदस्थापना जैसे कई काम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से किए जा सकेंगे। इससे कागजी फाइलों पर निर्भरता कम होगी और कर्मचारी संबंधी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने में मदद मिलेगी। इससे विभाग में होने वाले विभागीय भ्रष्टाचार भी कही हद तक रुखेगे।
एक डिजिटल प्रोफाइल में पूरा सेवा रिकॉर्ड
ई-एचआरएमएस के माध्यम से प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी की सेवा से जुड़ी जानकारी एक डिजिटल प्रोफाइल में उपलब्ध रहेगी। इसमें सेवा-वृत्त, वेतन पर्ची, जीपीएफ की जानकारी, अवकाश विवरण और अन्य महत्वपूर्ण सेवा रिकॉर्ड शामिल होंगे। कर्मचारियों को अपनी जानकारी के लिए बार-बार अलग-अलग शाखाओं या कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।
छुट्टी, भ्रमण और अनुमति के काम भी ऑनलाइन
अवकाश, शासकीय भ्रमण और विभिन्न सेवा संबंधी अनुमतियों के आवेदन ऑनलाइन प्रक्रिया से निपटाए जाएंगे। इसके अलावा पदोन्नति, परिवीक्षा अवधि, सेवा की पुष्टि और स्थापना से जुड़े मामलों के निपटारे में भी डिजिटल व्यवस्था का उपयोग होगा। स्थानांतरण, पदस्थापना और कैडर प्रबंधन की प्रक्रिया को भी इसी सिस्टम के जरिए अधिक व्यवस्थित करने की तैयारी है।
विभागीय जांच की हर स्टेज होगी ट्रैक
डीई पोर्टल के जरिए विभागीय जांच प्रकरणों की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन ट्रैक की जा सकेगी। मामला दर्ज होने से लेकर जांच और अंतिम निर्णय तक प्रत्येक चरण की स्थिति डिजिटल रूप से देखी जा सकेगी। इससे लंबित विभागीय जांचों की निगरानी और उनके समयबद्ध निपटारे में मदद मिलेगी। एसीआर-एपीएआर भी डिजिटल निगरानी में अधिकारियों और कर्मचारियों के एसीआर-एपीएआर (वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन) के प्रबंधन और मॉनिटरिंग को भी डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। इससे रिपोर्ट तैयार करने, आगे बढ़ाने और उसकी स्थिति की निगरानी की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।
IFMIS-SPARROW समेत अन्य सिस्टम से होगा एकीकरण
ई-एचआरएमएस को IFMIS-SPARROW सहित कर्मचारी संबंधी अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से एकीकृत किया जाएगा। इससे अलग-अलग सिस्टम में उपलब्ध कर्मचारी संबंधी जानकारी को एक-दूसरे के साथ उपयोग करने में आसानी होगी और डेटा प्रबंधन अधिक प्रभावी हो सकेगा। विभागों में प्रशिक्षण और नियमित मॉनिटरिंग सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों और उनके अधीनस्थ क्षेत्रीय कार्यालयों में व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। कर्मचारियों और अधिकारियों को पोर्टल के उपयोग के लिए विभागवार प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही पोर्टल की प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग भी की जाएगी। शासन का उद्देश्य कागजी प्रक्रिया कम करने के साथ सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और गति बढ़ाना है।
जीएडी अफसर की अध्यक्षता में समिति गठित
ई-एचआरएमएस एवं डीई पोर्टल के विभिन्न मॉड्यूलों के परीक्षण, चरणबद्ध क्रियान्वयन और जरूरत के अनुसार मानव संसाधन प्रबंधन, वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन तथा विभागीय जांच से जुड़े मौजूदा नियमों व प्रक्रियाओं में संशोधन की अनुशंसा के लिए शासन ने समिति गठित की है। उप सचिव, सामान्य प्रशासन अंकित अस्थाना को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। समिति में उप सचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय सुधीर कोचर और प्रमुख, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई), एमपीएसईडीसी को सदस्य बनाया गया है। वहीं अपर सचिव, सामान्य प्रशासन सचिन्द्र राव को सदस्य सचिव नामित किया गया है। नई डिजिटल व्यवस्था पूरी तरह लागू होने के बाद कर्मचारियों से जुड़े सेवा मामलों में फाइलों की आवाजाही कम होने और आवेदन से लेकर निर्णय तक की प्रक्रिया ऑनलाइन ट्रैक होने की उम्मीद है।

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