पुरी में जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान भगदड़, एक श्रद्धालु की मौत; पहले दिन की यात्रा रोकी गई
तेज बारिश के बीच रथों के पास बढ़ी भीड़, धक्का-मुक्की के बाद मची भगदड़; शुक्रवार सुबह फिर शुरू होगी यात्रा

जनोदय पंच। ओडिशा के पुरी में जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान गुरुवार शाम भगदड़ मचने से एक श्रद्धालु की मौत हो गई। तेज बारिश के बीच रथों के पास अचानक भीड़ बढ़ने से धक्का-मुक्की हुई। पहले दिन की यात्रा कुछ दूरी तय करने के बाद रोक दी गई, जिसे शुक्रवार सुबह पुनः शुरू किया जाएगा।
ओडिशा के पुरी में गुरुवार को आयोजित जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान शाम करीब 5 बजे पहांडी रस्म के समय भगदड़ मच गई। भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु अचानक रथों के निकट पहुंचने लगे। यात्रा मार्ग पर तैनात वॉलेंटियर भीड़ को पीछे हटाने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान धक्का-मुक्की शुरू हुई और देखते ही देखते भगदड़ की स्थिति बन गई। हादसे में एक श्रद्धालु की मौत हो गई।
बारिश के बीच यात्रा मार्ग पर उमड़ी भारी भीड़
घटना के समय पुरी में तेज बारिश हो रही थी। इसके बावजूद यात्रा मार्ग पर 10 लाख से अधिक श्रद्धालु मौजूद थे। भगदड़ के दौरान कई लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े। भीड़ में फंसे कई श्रद्धालुओं को सांस लेने में तकलीफ होने लगी, जिसके बाद उनका रेस्क्यू किया गया। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए और भीड़ को व्यवस्थित करने का काम जारी रखा।
कुछ दूरी चलने के बाद पहले दिन की यात्रा रोकी गई
घटना के बाद शाम करीब 7:30 बजे भगवान जगन्नाथ का रथ आगे बढ़ सका। हालांकि रथ कुछ ही मीटर चल पाया और पहले दिन की यात्रा यहीं रोक दी गई। जानकारी के अनुसार यात्रा शुक्रवार सुबह दोबारा शुरू होगी और लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित गुंडीचा मंदिर तक पहुंचेगी।
रथयात्रा में पहले भी हो चुके हैं हादसे
पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान इससे पहले भी भगदड़ की घटनाएं हो चुकी हैं। 18 जुलाई 2015 को नवकलेवर वर्ष के दौरान भगवान बलभद्र का रथ खींचे जाने के समय ग्रैंड रोड के मारिचिकोट चौक के पास भीड़ बढ़ने से भगदड़ जैसी स्थिति बनी थी। उस घटना में दम घुटने से दो महिलाओं की मौत हुई थी और छह लोग घायल हुए थे। वहीं 29 जून 2025 को गुंडीचा मंदिर के बाहर सरधाबली क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भीड़ एक साथ आगे बढ़ने से भगदड़ मच गई थी। उस हादसे में तीन श्रद्धालुओं की मौत हुई थी, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हुए थे। घटना के बाद राज्य सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए थे तथा लापरवाही के आरोप में कई अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई थी।



