
28 साल बाद वनकर्मियों की फिर होगी नपती
खुद के मेडिकल सर्टिफिकेट से हुई थी नियुक्ति, शिकायतों के बाद जिला मेडिकल बोर्ड करेगा हाइट की जांच।
इंदौर सर्किल के चार वन मंडलों में करीब एक दर्जन शिकायतें; जिला मेडिकल बोर्ड के सामने खुलेगा भर्ती में शारीरिक पात्रता का राज।
धार। भोपाल
वन विभाग में करीब 28 साल पहले हुई वनरक्षकों की भर्ती अब एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। भर्ती के समय अभ्यर्थियों की ऊंचाई और अन्य शारीरिक मापदंडों की जांच सरकारी मेडिकल बोर्ड से कराने के बजाय उनके द्वारा प्रस्तुत मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट के आधार पर प्रक्रिया पूरी की गई थी। अब वर्षों बाद कुछ कर्मचारियों की ऊंचाई निर्धारित मापदंड से कम होने की शिकायतें सामने आने के बाद विभाग ने दोबारा शारीरिक माप कराने की तैयारी शुरू कर दी है। शिकायतों के आधार पर संबंधित वनकर्मियों को अधिकृत जिला मेडिकल बोर्ड के सामने पेश किया जाएगा। मामले में खास बात यह है कि जिन कर्मचारियों की भर्ती को करीब तीन दशक का समय बीत चुका है, अब उनके पुराने सर्विस रिकॉर्ड को सामने रखकर वर्तमान में ऊंचाई की जांच की जाएगी। शिकायत सही पाए जाने पर भर्ती के समय निर्धारित शारीरिक मापदंड पूरे किए गए थे या नहीं, इसे लेकर विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
शिकायतों के बाद मुख्यालय ने मांगी दोबारा जांच
वन विभाग के मुख्यालय तक पहुंची शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि कुछ ऐसे अभ्यर्थी भी वन विभाग में भर्ती हो गए थे, जिनकी ऊंचाई निर्धारित मापदंड से कम थी। शिकायतों के बाद मुख्यालय ने संबंधित कर्मचारियों की दोबारा नपती कराने के निर्देश दिए हैं।बइसके बाद वन मंडलों में शिकायत वाले कर्मचारियों की सूची तैयार कर उन्हें अधिकृत जिला मेडिकल बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। जांच के दौरान कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड को भी मेडिकल बोर्ड के सामने रखा जाएगा, ताकि भर्ती से जुड़े उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल की जा सके।
एसडीओ-रेंजर रहेंगे मौजूद, होगी पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी
इंदौर वन मंडल को भी वन मुख्यालय का पत्र प्राप्त हुआ है। निर्देशों के मुताबिक संबंधित वनकर्मियों को एसडीओ और रेंजर की मौजूदगी में जिला मेडिकल बोर्ड के सामने पेश किया जाएगा। ऊंचाई मापने की प्रक्रिया को पारदर्शी रखने के लिए इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई जाएगी वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, शिकायत वाले कर्मचारियों की मेडिकल बोर्ड के माध्यम से जांच कराई जाएगी और प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। यानी अब ऊंचाई की जांच विभागीय स्तर पर नहीं, बल्कि अधिकृत मेडिकल बोर्ड के सामने कराई जाएगी।
इंदौर सर्किल के चार वन मंडलों में करीब एक दर्जन शिकायतें
करीब 28 साल पहले इंदौर, देवास, उज्जैन, बालाघाट, मंडला, शहडोल, हरदा सहित प्रदेश के कई जिलों में एक साथ वन विभाग की भर्ती हुई थी। इसी भर्ती प्रक्रिया में इंदौर सर्किल के अंतर्गत आने वाले इंदौर, धार, झाबुआ और आलीराजपुर वन मंडलों में भी वनरक्षक और डिप्टी रेंजर पदों पर नियुक्तियां हुई थीं।
बताया जा रहा है कि इन चार वन मंडलों में करीब एक दर्जन कर्मचारियों की ऊंचाई को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। इनमें वनरक्षक के साथ डिप्टी रेंजर और अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े कर्मचारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। फिलहाल विभाग शिकायत वाले कर्मचारियों की ही दोबारा नपती कराने जा रहा है। जांच के परिणाम के आधार पर आगे अन्य कर्मचारियों की जांच का दायरा बढ़ सकता है।
तब रनिंग और लिखित परीक्षा, मेडिकल सर्टिफिकेट से पूरी हुई शारीरिक पात्रता
उस समय भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों की रनिंग और लिखित परीक्षा हुई थी। वहीं ऊंचाई और अन्य शारीरिक दक्षताओं की पात्रता के लिए सरकारी मेडिकल बोर्ड की जगह अभ्यर्थियों को अपने स्तर पर मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट प्रस्तुत करने की व्यवस्था थी। यही व्यवस्था अब शिकायतों के केंद्र में है। विभाग के सामने सवाल यह है कि जिन कर्मचारियों की नियुक्ति के समय मेडिकल प्रमाण-पत्र के आधार पर शारीरिक पात्रता स्वीकार की गई थी, क्या उन्होंने वास्तव में निर्धारित ऊंचाई का मापदंड पूरा किया था? शिकायतों के बाद अब इसी बिंदु की दोबारा जांच कराई जा रही है।
वनरक्षक भर्ती में कितनी ऊंचाई जरूरी?
वनरक्षक पद के लिए निर्धारित शारीरिक मापदंडों के अनुसार सामान्य और ओबीसी वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों की न्यूनतम ऊंचाई 163 सेंटीमीटर, जबकि महिलाओं की 150 सेंटीमीटर होना जरूरी है। वहीं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम ऊंचाई 152 सेंटीमीटर और महिलाओं के लिए 145 सेंटीमीटर निर्धारित है। ऐसे में मेडिकल बोर्ड की जांच में यदि किसी कर्मचारी की ऊंचाई निर्धारित मानक से कम पाई जाती है तो भर्ती के समय उसकी पात्रता और प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की भी जांच का विषय बन सकती है।
इंदौर में एक कर्मचारी की जांच की प्रक्रिया शुरू
इंदौर में फिलहाल एक कर्मचारी की ऊंचाई को लेकर शिकायत के बाद जांच की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी सामने आई है। संबंधित कर्मचारी को उसके सर्विस रिकॉर्ड के साथ अधिकृत मेडिकल बोर्ड के सामने पेश किया जाएगा। वहां निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऊंचाई मापी जाएगी। इस जांच के बाद शिकायत वाले अन्य कर्मचारियों को भी इसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। यानी आने वाले दिनों में इंदौर सर्किल के धार, झाबुआ और आलीराजपुर समेत अन्य वन मंडलों में भी यह प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है। वहीं जांच की जाए तो कही कर्मचारी सामने आ सकते हैं।
मानक से कम निकली हाइट तो नौकरी पर भी संकट
मेडिकल बोर्ड की जांच में यदि किसी कर्मचारी की ऊंचाई निर्धारित मापदंड से कम पाई जाती है तो मामला केवल रिकॉर्ड में दर्ज होने तक सीमित नहीं रहेगा। विभागीय नियमों के अनुसार भर्ती के समय पात्रता से जुड़ी अनियमितता सामने आने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
ऐसे मामलों में नौकरी से बर्खास्तगी से लेकर अब तक प्राप्त वेतन की वसूली तक की कार्रवाई का प्रावधान लागू हो सकता है। हालांकि अंतिम कार्रवाई जांच, उपलब्ध दस्तावेजों, भर्ती के समय लागू नियमों और विभागीय प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगी।
28 साल बाद उठे सवालों से विभाग में हलचल
करीब तीन दशक बाद शुरू हुई यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिन कर्मचारियों की ऊंचाई अब मापी जाएगी, वे लंबे समय से विभाग में सेवा दे रहे हैं। अब मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट यह तय करने में अहम होगी कि शिकायतों में कितनी वास्तविकता है और भर्ती के समय शारीरिक पात्रता से जुड़े नियमों का पालन हुआ था या नहीं। फिलहाल नजर मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर है। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायतें केवल रिकॉर्ड की जांच तक सीमित रहती हैं या फिर 28 साल पुरानी भर्ती में कार्रवाई की नई शुरुआत होती है।




