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फसल की आड़ में नशे का कारोबार: धार जिले में नशे की खेती का जाल! खेतों से वन क्षेत्र तक नशे का कारोबार, हजारों पौधे उगे, फिर भी दोनो विभागो को भनक तक नहीं?

हजारों पौधे कपास, तुअर और गराडू की फसलों के बीच उगाए जा रहे थे, वन क्षेत्र में भी मिली अवैध खेती जिम्मेदारों की निगरानी पर सवाल!

आशीष यादव धार।

धार जिले में अवैध गांजे की खेती के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कहीं कपास के खेतों में तो कहीं तुअर और गराडू की फसल के बीच गांजे के पौधे उगाए जा रहे थे। राजगढ़ के वन क्षेत्र से लेकर तिरला और मनावर के उकाला क्षेत्र के खेतों तक पुलिस की कार्रवाई में हजारों हरे पौधे जब्त किए गए हैं। वन विभाग द्वारा दिए गए पट्टों पर भी अवैध गांजे की खेती हो रही हैं। जंगल की रखवाली की जिम्मेदारी वन विभाग की है, लेकिन जब उसी वन क्षेत्र में करोड़ों रुपये कीमत का गांजा उगाया जाता रहा और इसकी भनक विभाग को न लगे,तो निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। राजगढ़ के ग्राम चौबारा के वन क्षेत्र में पुलिस की कार्रवाई ने इसी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पुलिस ने दो दिन तक दिन-रात सर्चिंग कर 3,345 गांजे के पौधे जब्त किए, जिनका कुल वजन 3,695 किलोग्राम औरअनुमानित कीमत 4 करोड़ 43 लाख रुपये बताई गई है। आरोपी राजू भूरिया फरार है।

किसके इशारे पर चल रहा है अवैध गांजे कारोबार:
जिले में खेतों में फसल उग रही है या नशे का कारोबार फल-फूल रहा है, यह सवाल अब पुलिस की लगातार हो रही कार्रवाइयों के बीच खड़ा हो रहा है। कपास, तुअर और गराडू की फसलों के बीच गांजे की अवैध खेती की जा रही थी, तो राजगढ़ के वन क्षेत्र में भी हजारों पौधे मिले। तिरला, मनावर और राजगढ़ में सामने आए मामलों में करोड़ों रुपए के गांजे के पौधे जब्त होना बताता है कि यह समस्या किसी एक खेत या एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चार कार्रवाइयों में कुल 5,362 पौधे जब्त किए गए, जिनका वजन करीब 59.31 क्विंटल है। इनकी बताई गई अनुमानित कीमत करीब 7.59 करोड़ रुपए है। एक मामले में आरोपी गिरफ्तार हुआ, जबकि अन्य मामलों में आरोपी फरार बताए गए हैं। ऐसे में सवाल है कि जब खेतों में फसल के साथ नशे की खेती हो रही थी, तब इसकी भनक संबंधित निगरानी तंत्र को क्यों नहीं लगी? कार्रवाई के बाद भी क्या अवैध खेती के पूरे नेटवर्क तक पहुंचना पुलिस के लिए चुनौती बना रहेगा

पुलिस ने जंगल में उतरकर खोली अवैध खेती की परतें,:
पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना के निर्देशन में चल रहे नशामुक्ति अभियान के तहत पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा के मार्गदर्शन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पारुल बेलापुरकर तथा एसडीओपी सरदारपुर विश्वदीप सिंह परिहार के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। थाना प्रभारी समीर पाटीदार की टीम ने 13 अक्टूबर 2026 को ग्राम चौबारा के वन क्षेत्र में अवैध गांजे की खेती की सूचना पर अभियान शुरू किया। धार-झाबुआ जिले की सीमा से लगे वन क्षेत्र में लगातार दो दिन तक तलाशी ली गई। इस दौरान बड़ी संख्या में गांजे के पौधे मिले।

पीथमपुर की घास बीड़ में सड़क, अब चौबारा में गांजा
वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाला यह अकेला मामला नहीं है। पीथमपुर क्षेत्र की घास बीड़ वन भूमि पर सड़क बनाए जाने का मामला भी सामने आया था। शिकायत के बाद सड़क हटाई गई, लेकिन इस प्रकरण में जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध क्या कार्रवाई हुई, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। अब चौबारा में अवैध गांजे की खेती का खुलासा वन क्षेत्र की निगरानी पर नए सवाल खड़े कर रहा है।

वन विभाग की गश्त कहां थी?
इस कार्रवाई ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या वन क्षेत्र में नियमित गश्त नहीं होती? क्या बीट गार्ड अपने निर्धारित क्षेत्र में निरीक्षण नहीं करते? यदि जंगल में इतने बड़े पैमाने पर अवैध खेती होती रही,तो जिम्मेदार अमले को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली? फिलहाल इन सवालों के जवाब संबंधित विभाग की जांच और आधिकारिक पक्ष से ही स्पष्ट होंगे। दोनों मामलों में अब निगाहें वन विभाग पर हैं। क्या विभाग अपने स्तर पर जांच कर जिम्मेदारी तय करेगा? क्या लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी? या फिर कार्रवाई केवल अतिक्रमण हटाने और पौधे जब्त होने तक सीमित रह जाएगी? पुलिस की कार्रवाई ने अवैध खेती का खुलासा कर दिया है, अब वन विभाग की जवाबदेही सामने आना बाकी है।

अब तक यहां हुई कार्रवाई:
राजगढ़ के वन क्षेत्र में 3,345 पौधे जब्त:
राजगढ़ पुलिस ने 13 अक्टूबर को ग्राम चौबारा के वन क्षेत्र में अवैध गांजे की खेती की सूचना पर कार्रवाई की। यहां से गांजे के 3,345 हरे पौधे जब्त किए गए। इनका कुल वजन 3,695 किलोग्राम यानी करीब 37 क्विंटल बताया गया है। पुलिस के अनुसार, जब्त पौधों की अनुमानित कीमत 4 करोड़ 43 लाख रुपए है। मामले में आरोपी राजू भूरिया फरार है। पुलिस उसकी तलाश के साथ गांजे की खेती से जुड़े संभावित नेटवर्क की जांच कर रही है।

बोहारला में तीन खेतों से 1,223 पौधे मिले:
मनावर पुलिस ने ऑपरेशन प्रहार के तहत चौकी उमरबन क्षेत्र के ग्राम बोहारला में तीन अलग-अलग खेतों पर दबिश दी। यहां कपास की फसल के बीच अवैध रूप से गांजे की खेती की जा रही थी। कार्रवाई में कुल 1,223 पौधे जब्त किए गए, जिनका वजन 1,621.98 किलोग्राम यानी करीब 16.22 क्विंटल है। इनकी अनुमानित बाजार कीमत 2 करोड़ 43 लाख रुपए बताई गई है। पुलिस के अनुसार, नारायण पिता प्रताप भिलाला के खेत से 440 पौधे, वजन 705.75 किलोग्राम; मुलचंद पिता अर्जुन कनेल भिलाला के खेत से 568 पौधे, वजन 763.58 किलोग्राम; और रतन पिता रूपसिंह भिलाला के खेत से 215 पौधे, वजन 152.65 किलोग्राम जब्त किए गए

तिरला में कपास के खेत से 565 पौधे जब्त:
तिरला पुलिस ने कपास के खेत में अवैध गांजे की खेती का पर्दाफाश करते हुए 565 हरे पौधे जब्त किए। इनका कुल वजन 443.9 किलोग्राम और अनुमानित बाजार कीमत 53 लाख 26 हजार 800 रुपए बताई गई है। इस मामले में 54 वर्षीय आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की है।

उकाला में तीन खेतों पर दबिश, 229 पौधे मिले:
मनावर पुलिस ने ग्राम उकाला में कपास और गराडू के खेतों में अवैध रूप से उगाए जा रहे गांजे के 229 हरे पौधे जब्त किए। इनका कुल वजन करीब 170 किलोग्राम और अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 20 लाख रुपए बताया गया है। कार्रवाई तीन अलग-अलग खेतों पर की गई। इस मामले में तीन आरोपी फरार बताए गए हैं।

सबसे बड़ा सवाल…खेती से बाजार तक कौन जोड़ रहा कड़ियां:
मालवा-निमाड़ में सामने आए मामलों की गंभीरता केवल गांजे के पौधों की संख्या या उनकी अनुमानित कीमत से तय नहीं होती। खेती से लेकर सप्लाई नेटवर्क तक जांच की जरूरत अलग-अलग क्षेत्रों में सामने आए इन मामलों में एक समान बात यह है कि गांजे के पौधे सामान्य कृषि फसलों के बीच उगाए जा रहे थे। असल चुनौती उस व्यवस्था को समझने की है, जो दुर्गम इलाकों में खेती से लेकर फसल की कटाई, परिवहन और बिक्री तक काम कर सकती है। यदि बाहरी लोगों के स्थानीय स्तर पर नेटवर्क बनाने की आशंका सही साबित होती है, तो जांच में उन संपर्कों की पहचान करना जरूरी होगा, जो खेती कराने, फसल खरीदने और उसे दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचाने में भूमिका निभाते हैं। इसी तरह वनभूमि, शासकीय पट्टों वाली जमीन और निजी खेतों में अवैध खेती सामने आने के बाद भूमि उपयोग, स्थानीय निगरानी और संबंधित विभागों के बीच समन्वय की भी पड़ताल जरूरी है। पुलिस ने कुछ मामलों में नेटवर्क की जांच की बात कही है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और विवेचना के बाद ही इन पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

चार क्षेत्रों की कार्रवाई के आंकड़े
क्षेत्र पौधों कुल वजन अनुमानित की
राजगढ़ 3,345 3,695kg 4.43करोड़
(वन क्षेत्र)
मनावर 1,223 1,621.98kg 2.43 करोड़
(बोहारला)
तिरला 565 443.9 kg 53.27 लाख
मनावर 229 170 kg 20 लाख
(उकाला)
कुल 5,362 5,930.88kg 7.19 करोड़

निर्देशित किया है।
एसडीओ ओर रेंजर को निर्देश दिए हैं जो वन अधिकार के पट्टे व जंगल क्षेत्र में गांजे की खेती हो रही हे उसके लिए सभी वन कर्मचारीयो को अपने अपने क्षेत्र में निगरानी व जाँच करने को कहा है। ऐसी कोई खबर आती है तो संबंधित के खिलाफ तत्काल विभाग को सूचना दें। पुलिस ओर नारकोटिक्स डिपार्टमेंट के साथ कार्रवाई करेंगे।
लाल सुधाकर सिंह डीएफओ धार

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