शिक्षा-स्वास्थ्यताज़ा खबरबड़वानी

सेंधवा में सुरक्षित बचपन अभियान के तहत विद्यार्थियों को किया जागरूक, न्यायाधीशों ने कहा- अन्याय सहना नहीं, उसका प्रतिकार करना है

नेहरू स्मृति स्कूल एवं स्वामी विवेकानंद शिक्षा महाविद्यालय में बाल सुरक्षा, पॉक्सो एक्ट, साइबर अपराध, यातायात नियम और विद्यार्थियों के अधिकारों पर दी गई जानकारी

रमन बोरखड़े। सत्याग्रह लाइव। शिक्षा के साथ अनुशासन, जागरूकता और अपने अधिकारों की जानकारी भी विद्यार्थियों के लिए जरूरी बताई गई। सुरक्षित बचपन अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में बाल अपराधों से बचाव, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने, साइबर सुरक्षा, यातायात नियमों और बाल अधिकारों से जुड़े विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया गया।

अन्याय सहना अपराध को बढ़ावा देना है

शिक्षा प्रसारक समिति द्वारा संचालित नेहरू स्मृति हा.से. स्कूल एवं स्वामी विवेकानंद शिक्षा महाविद्यालय, जोगवाड़ा रोड स्थित परिसर में सुरक्षित बचपन अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि द्वितीय जिला अपर सत्र न्यायाधीश आदेश कुमार मालवीय ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यालय में ज्ञान प्राप्त करने के साथ अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मेहनत और अनुशासन आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों के साथ होने वाले अपराधों में कई बार बाहरी व्यक्ति के बजाय कोई करीबी ही लिप्त पाया जाता है। इसलिए सभी को सचेत रहने की आवश्यकता है। अन्याय सहना नहीं है, बल्कि उसका प्रतिकार करना है। अन्याय सहने का मतलब अपराध को बढ़ावा देना है। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को किशोर न्याय अधिनियम एवं पॉक्सो एक्ट के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी।

पॉक्सो एक्ट और बच्चों की सुरक्षा के बारे में बताया

विशिष्ट अतिथि तृतीय जिला अपर सत्र न्यायाधीश सेंधवा रश्मिना चतुर्वेदी ने विद्यार्थियों को वयस्क एवं अवयस्क की उम्र के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पॉक्सो एक्ट के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए समान कानून बनाए गए हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उनके साथ या आसपास किसी भी तरह की घटना होने पर उसे छिपाएं नहीं, बल्कि तुरंत अपने माता-पिता, शिक्षक या नजदीकी थाने में इसकी सूचना दें। उन्होंने लड़कों को लड़कियों का सम्मान करने की सलाह देते हुए कहा कि आसपास किसी लड़की के साथ कोई घटना होती है तो उसका प्रतिकार करना भी उनकी जिम्मेदारी है।

साइबर अपराध, डिजिटल अरेस्ट और यातायात सुरक्षा पर मार्गदर्शन

विशेष अतिथि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बड़वानी के सचिव कपिल वर्मा ने यातायात सुरक्षा की जानकारी देते हुए बताया कि 16 वर्ष की उम्र होने पर लर्निंग लाइसेंस बनवाकर ही वाहन का उपयोग करें तथा 18 वर्ष की उम्र पूरी होने पर लाइसेंस बनवाएं। उन्होंने बिना हेलमेट वाहन चलाने से होने वाली दुर्घटनाओं के प्रति भी विद्यार्थियों को जागरूक किया।

उन्होंने साइबर अपराधों के बदलते तरीकों की जानकारी देते हुए बताया कि अपराधी दूर विदेश में बैठकर भी किसी के बैंक खाते से रकम निकाल सकते हैं। उन्होंने एपीके फाइल से होने वाले नुकसान के बारे में भी बताया।

इस अवसर पर साइबर एक्सपर्ट बड़वानी नीरज डांगरे ने विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने मोबाइल, इंटरनेट, ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया के कारण होने वाले आर्थिक, शारीरिक एवं मानसिक नुकसान की जानकारी दी। साथ ही साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी समस्याओं के समाधान बताए। विद्यार्थियों के सवालों के जवाब देने के साथ ही साइबर संबंधी घटनाओं के लिए हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी दी।

अधिकारों के साथ कर्तव्यों का पालन भी जरूरी

जिला विधिक सेवा अधिकारी रॉबिन दयाल ने कहा कि छोटी स्तर पर होने वाली गलतियों को सुधारा जा सकता है, लेकिन बड़ी स्तर पर हुई गलतियों को ठीक करना संभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि पॉक्सो एक्ट की जानकारी के अभाव में भी जेल हो सकती है। मोबाइल में मौजूद डेटा कभी पूरी तरह मिटता नहीं है, इसलिए विद्यार्थियों को मोबाइल का उपयोग अपनी आवश्यकता के अनुसार ही करना चाहिए।

अभिभाषक संघ सेंधवा के अध्यक्ष शैलेश कुमार जोशी ने विद्यार्थियों को उनके अधिकारों के साथ कर्तव्यों का बोध कराया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार मिलने के साथ यह जिम्मेदारी भी है कि विद्यार्थी अच्छी तरह पढ़ाई करें और देश के जिम्मेदार नागरिक बनें। उन्होंने बाल श्रम कानून की जानकारी भी दी।

संस्था के 72 वर्षों की गतिविधियों से कराया अवगत

संस्था अध्यक्ष रविंद्र सिंह मंडलोई ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि सुरक्षित बचपन अभियान के तहत ऐसे विषय पर चर्चा के लिए एकत्रित हुए हैं, जिसका सीधा संबंध देश के भविष्य यानी बच्चों से है। बदलते दौर में बच्चों को शारीरिक, मानसिक एवं डिजिटल स्तर पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में बच्चों के लिए अच्छा माहौल तैयार करना सभी की जिम्मेदारी है।

निवर्तमान अध्यक्ष बी. एल. जैन ने संस्था की विगत 72 वर्षों की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों को कम से कम शुल्क में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संस्कार प्रदान करना है। संस्कार के बिना राष्ट्र उन्नति नहीं कर सकता। इसी उद्देश्य से संस्था में विद्यार्थियों को संस्कारित एवं अनुशासित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

विद्यार्थियों ने किया संचालन, अतिथियों का माना आभार

कार्यक्रम का संचालन विद्यालयीन विद्यार्थी त्रिशा गुप्ता एवं अलविरा शाह ने किया। आभार संस्था सचिव तेजस शाह ने माना। इस अवसर पर पूर्व अध्यक्ष पीरचंद मित्तल, दिलीप कानूनगो, कोषाध्यक्ष दीपक लालका, सह सचिव मनोज कानूनगो, विष्णुप्रसाद सिंव्हल, शरद कानूनगो, समस्त प्राचार्य, शिक्षक एवं शिक्षिकाएं मौजूद थे।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!