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मेरी बीट मेरा अभिमान तनावमुक्त होकर फील्ड में काम करने का वनरक्षकों को प्रशिक्षण

वन्यजीव सुरक्षा से लेकर ग्रामीणों से बेहतर संवाद तक सिखाए गुर, टीमवर्क और मानसिक मजबूती पर भी जोर

मेरी बीट मेरा अभिमान तनावमुक्त होकर फील्ड में काम करने का वनरक्षकों को प्रशिक्षण
वन्यजीव सुरक्षा से लेकर ग्रामीणों से बेहतर संवाद तक सिखाए गुर, टीमवर्क और मानसिक मजबूती पर भी जोर
आशीष यादव धार
जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा में जुटे मैदानी अमले को मानसिक रूप से मजबूत बनाने और फील्ड ड्यूटी के दौरान तनावमुक्त होकर बेहतर कार्य करने के उद्देश्य से धार वन मंडल में ‘मेरी बीट मेरा अभिमान’ अभियान के तहत दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। कार्यशाला में वनरक्षकों को बीट की नियमित निगरानी के साथ वन्यजीव सुरक्षा, अवैध कटाई और शिकार पर नजर रखने, ग्रामीणों से समन्वय तथा आपात परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
तनाव प्रबंधन और सकारात्मक सोच पर फोकस
कार्यशाला में सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल नंदिनी सेन और प्रिया चौधरी ने वन विभाग के कर्मचारियों को मानसिक रूप से मजबूत रहने और सकारात्मक सोच के साथ फील्ड में जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया। ग्रुप एक्टिविटी, संवाद, टीम-बिल्डिंग और तनाव प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से कर्मचारियों को विपरीत परिस्थितियों में संयम बनाए रखने और एक-दूसरे के सहयोग से काम करने की सीख दी गई।
कार्यशाला का उद्देश्य केवल कर्मचारियों को विभागीय कार्यों की जानकारी देना नहीं, बल्कि फील्ड में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए उन्हें मानसिक तौर पर तैयार करना भी है। जंगलों में लंबे समय तक ड्यूटी, वन्यजीवों से जुड़े जोखिम और ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली विभिन्न परिस्थितियों के बीच कर्मचारियों को धैर्य और बेहतर निर्णय क्षमता के साथ काम करने पर जोर दिया गया।
पहली बार कार्यालयीन अमला भी शामिल:
कार्यशाला में धार वन मंडल के कार्यालयीन कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है। इसे लेकर विभागीय स्तर पर चर्चा है। कर्मचारियों का कहना है कि पूर्व में इस तरह के आयोजनों में मुख्य रूप से मैदानी अमले को ही बुलाया जाता था। कार्यालयीन कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण में शामिल किए जाने से यह संकेत माना जा रहा है कि विभाग उन्हें भी भविष्य में फील्ड से जुड़े कार्यों और गतिविधियों में शामिल करने की तैयारी कर रहा है। कार्यालयीन वन रक्षको को भी प्रशिक्षण में शामिल किए जाने से विभाग में इसे नई कार्यप्रणाली की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। 
बीट की निगरानी से वन्यजीव सुरक्षा तक जिम्मेदारियां
‘मेरी बीट मेरा अभिमान’ अभियान के तहत वनरक्षकों को अपनी-अपनी बीट को लेकर जिम्मेदारी और जवाबदेही का भाव विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। उन्हें नियमित गश्त और निगरानी के साथ जंगल में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटाने, अवैध कटाई और शिकार पर नजर रखने तथा वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के संबंध में जागरूक किया गया।
इसके अलावा ग्रामीणों एवं स्थानीय लोगों से बेहतर संवाद और समन्वय स्थापित करने, किसी घटना या वन्यजीव संबंधी गतिविधि की जानकारी तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने पर भी प्रशिक्षण दिया गया। आपात स्थिति में सही निर्णय लेने, टीम के साथ तालमेल बनाकर काम करने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने को भी प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया।
‘मेरी बीट’ से बढ़ेगा जिम्मेदारी का भाव
अभियान का मूल उद्देश्य वनरक्षकों को उनकी बीट से जोड़ना और यह भावना विकसित करना है कि जिस क्षेत्र की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई है, उसकी सुरक्षा और निगरानी उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। कार्यशाला के माध्यम से कर्मचारियों में अपने कार्यक्षेत्र के प्रति अपनापन, जिम्मेदारी, टीम भावना और बेहतर कार्य संस्कृति विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम में एसडीओ सुरेश बारोले, रेंजर प्रभुराम मुछाला, उर्मिला वसुनिया, बबीता बघेल, सुशील यादव, नितिन पंवार, चेतना कुशवाह, आशा आर्य, ललिता भारती, मनीष गेहलोत, सोनिली चौहान, जितेंद्र गौड़, आकाश बडेरा, गौरव तिवारी, रितेश त्रिवेदी और प्रिया सिंह सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने सहभागिता की।

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