इतिहास को संजोने की कवायद… मुख्यमंत्री के निर्देश पर मप्र पर्यटन निगम टीम ने किया अवलोकन माता अमका-झमका तीर्थ पर शीघ्र आकार लेगा श्रीकृष्ण-रुक्मिणि लोक
भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को पत्थरों पर कलाकृतियों के माध्यम से किया जाएगा प्रदर्शित

इतिहास को संजोने की कवायद…
मुख्यमंत्री के निर्देश पर मप्र पर्यटन निगम टीम ने किया अवलोकन माता अमका-झमका तीर्थ पर शीघ्र आकार लेगा श्रीकृष्ण-रुक्मिणि लोक
भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को पत्थरों पर कलाकृतियों के माध्यम से किया जाएगा प्रदर्शित
धार
प्रसिद्ध अमका-झमका माता मंदिर में धार्मिक लोक बनाने की कवायद शुरू हो गई है। इसके तहत मप्र पर्यटन विकास निगम की टीम द्वारा अमझेरा पहुंचकर भौतिक निरीक्षण कर रुपरेखा तैयार की है। बता दें कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव – द्वारा विधानसभा सदन में यह बात कही थी कि जहां-जहां भगवान श्रीकृष्ण के चरण पड़े, वहां-वहां उन स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित इसी कड़ी में अमझेरा स्थित माता अमका-झमका तीर्थ को श्रीकृष्ण-रुक्मिणि लोक बनाने की तैयारी है। किया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि द्वापरयुग में भगवान श्रीकृष्ण स्वयं रथ लेकर अमझेरा पहुंचे थे और अमका-झमका मंदिर के समीप रूक्मिणी का वरण कर द्वारिका लेकर गए थे। इसी महत्व को ध्यान में रखते हुए महाकाल लोक की तर्ज पर श्रीकृष्ण-रूक्मिणी लोक बनाने की घोषणा भी की गई थी। वहीं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव हर साल अमका-झमका आते इस बार भी उनके दौरे लेकर उम्मीद जताई जा रही है।

दो साल में तीन स्तर पर सर्वे:
इस मंदिर के धार्मिक महत्व को देखते हुए विगत दो वर्षों में बड़े स्तर के तीन सर्वे शासन की ओर से किए जा चुके हैं। शनिवार को मप्र पर्यटन निगम की टीम द्वारा सर्वे किया गया। जिसमें इन्दौर संभाग के
कार्यपालन यंत्री दीपक राज ने जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री की मंशानुसार एवं उनके निर्देश पर यहां बनने वाले भगवान श्रीकृष्ण-रूक्मिणी लोक के मुख्य सर्वे के लिए आए है।
मांगोद में बनेगा भव्य द्वार;
इन्दौर-अहमदाबाद मार्ग पर स्थित मांगोद में भव्य द्वार बनेगा जो सभी के लिए आकर्षण का केन्द्र रहेगा। विभागीय एसडीओ निलेश संगले, माता अमक-झमका विकास समिति के संरक्षक कमल यादव, अध्यक्ष प्रकाश राठौड़, पुजारी अभिजीत पंडित सहित अन्य सदस्यगण मौजूद रहे। उल्लेखनीय है कि पिछले दो वर्षों से मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व अमझेरा में मनाते चले आ रहे हैं तथा इस बार भी संभावना है कि वे जन्माष्टमी पर अमझेर पहुंचेंगे। जिसे लेकर भी विभागीय अधिकारीयों में हलचल देखी जा रही है। उज्जैन में आयोजति सिंहस्थ पर्व को भी ध्यान में रखते हुए तीर्थ स्थानों की महिमा बढ़ाई जा रही है।
पत्थरों पर उकेरी जाएगी लीलाएं:
भाजपा नेता कमल यादव ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर मृत्यु तक उनकी सभी लीलाओं को पत्थरों से बनने वाली प्रतिमाओं के माध्यम से प्रदर्शित कर उकेरा जाएगा। अमका-झमका सहित पांडव कालीन गुफाओं का संरक्षण व अन्य मंदिरो को पत्थरों से नवीन आकार देकर संवारा जाएगा। साथ ही यहां प्राकृतिक झरनों व परिसर में सौंदर्गीकरण किया जाएगा। पयर्टकों के लिए बोटिंग की व्यवस्था भी रहेगी। जिसके लिए नवीन पुल-पुलियाओं का भी निर्माण किया जाएगा। इन सभी बातों के साथ श्रीकृष्ण रूक्मिणि लोक श्रीकृष्ण पाथवे से भी जड़ गया है। जिससे नारायणाधाम व सांदिपनी आश्रम उज्जैन व जानापाव का सीधा संपर्क अमझेरा जुड़ सकेगा।





